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RCT - Introduction
INTRODUCTION

१८९० मे ब्रिटिश पार्लियामेन्ट द्वारा एक क़ानून बनाया और पास किया गया जिसे भारतीय रेल अधिनियम के नाम से जानते हैं | रेलों से संबंधित मामलो से निपटने के उद्देश्य से ये कानून बनाये गए | स्वतंत्रता के बाद यह महसूस किया गया कि वर्तमान समय के लोगो की जरूरतों को पूरा करने के लिए इन अधिनियमो मे कुछ परिवर्तन किये जाने चाहिए | अतः १८९० के कुछ प्रावधानों को यथावत रखते हुये एवं कुछ, जो जरूरी नही थे, उन्हें नये प्रावधानों से विस्थापित करके एक नया अधिनियम बनाया गया, जिसे रेल अधिनियम १९८९ के नाम से जानते है जो कि १ जुलाई, १९९० से लागू हुआ था |

इस अधिनियम की मुख्य विशेषतायें ये थी कि रेलवे का जोनों मे पुनर्गठन किया गया और हर ज़ोन का एक महाप्रबंधक होगा | केन्द्रीय सरकार को माल और यात्री भाड़ा स्थिर करने का अधिकार होगा | सामान के खो जाने, नुकसान हो जाने पर या दुर्घटना मे हुई मृत्यु या यात्रियों को लगी चोट के मुआवजे का प्रावधान था | रेल की आर्थिक जिम्मेदारियों जैसे सामान की दुलाई आदि सम्बन्धी विशेष प्रावधान लागू किए गये | रेल प्रबंधक के खिलाफ हुए दावा के मामलो के त्वरित फैसले के लिए रेल दावा अधिकरण के अधिनियम १९८९ नियम बनाये गये |

यदपि रेल प्रशासन के द्वारा प्रेषकपरेषिती के सामान आदि की गई क्षतिपूर्ति या यात्रियो के हताहत होने का दिए गये मुआवजे से संतुष्ट ना होने पर वो कोर्ट मे मामला दर्ज कर सकते हैं जिससे दावा के निर्णय मे बहुत ज्यादा समय लगता था और मुकदमेबाजी बहुत ज्यादा समय तक चलती थी | इसलिए दावों के मामलो का शीघ्र से शीघ्र निर्णय की जरूरत महसूस की गई जिसके परिणाम स्वरूप रेल दावा अधिनियम की स्थापना की गई जो की ऐसे दावा के मामलो पर कार्यवाही और उनका शीघ्र निपटारा करेगा | इसके परिणाम स्वरूप कोर्ट का भार कम हुआ और लोगो को शीघ्र राहत मिलाने लगी | किराया और माल-भाडे की वापसी का मामला भी अधिकरण के कार्य क्षेत्र मे लाया गया |

रेल प्रशासन को रेल से ले जाने के लिए सौफे गये सामान या जानवरों के खो जाने, नुकसान हो जाने और अप्राप्ति की दशा मे या किराये और माल-भाडे की वापसी या रेल दुर्घटना के परिणाम स्वरूप हुई यात्रियो की मृत्यु या उनके चोट लगने के मामलो से निपटने के लिए रेल दावा अधिकरण और रेल द्वारा अधिकरण के अधिनियम बनाये गये |

इस अधिनियम की प्रणाली\योजना यह दर्शाती है कि इसमे कोई अधिकरण एवं इसकी पीठ स्थापित करने तथा इसके अधिकार क्षेत्र, सामर्थ्य, प्रभुत्व, कार्य- विधि, इसके आदेशों एवं अपीलों को क्रियान्वित करने का प्रावधान हैं | इस तरह से ये अधिनियम स्वंय मे एक अधिनियम है जो कि सामान्य लोगों की समस्यो को बहुत ज्यादा हल करता हैं |